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आधुनिक शिक्षा में विधिक साक्षरता एक अनिवार्य अंग है क्योंकि अधिकारों की जानकारी नागरिकों को सशक्त बनाती है-कु0 डिंपल*

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 //समाचार//


*आधुनिक शिक्षा में विधिक साक्षरता एक अनिवार्य अंग है क्योंकि अधिकारों की जानकारी नागरिकों को सशक्त बनाती है-कु0 डिंपल*



*कोरबा से जिला ब्यूरो चीफ महेन्द्र सोनवानी की खास रिपोर्ट*


कोरबा 14 नवंबर 2025/

छ0ग0 राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण बिलासपुर के स्टेट प्लान आफ एक्शन के अनुसार एवं प्रधान जिला एवं सत्र न्यायाधीश/अध्यक्ष, जिला विधिक सेवा प्राधिकरण कोरबा के निर्देशानुसार कस्तुरबा गांधी बालिका आवासीय विद्यालय कोरबा में आयोजित विशेष जागरूकता कार्यक्रम में शिक्षा के ऐतिहासिक विस्तार उसके विकास सुगमता और कानूनी साक्षरता की महत्ता पर चर्चा कार्यक्रम में मुख्य वक्ता सचिव कु0 डिंपल ने अपने उद्बोधन में प्राचीन गुरूकुल की परंपरा से लेकर ब्रिटिश काल की औपचारिक शिक्षा पद्धाति और स्वतंत्रता के बाद की क्रमिक शैक्षणिक विकास सुगम और सर्वसुलभ यात्रा के रूप में प्रस्तुत किया। ज्ञान जितना व्यापक न्याय उतना सशक्त मूल भावना को जिला विधिक सेवा प्राधिकरण कोरबा ने छात्राओं को शिक्षा के महत्व के साथ कानूनी जानकारी दी छात्राओं को प्रधान जिला सत्र न्यायाधीश श्री संतोष शर्मा के संदेश को बतायाः- शिक्षा का उद्देश्य केवल पढ़ना लिखना नहीं बल्कि समाज को जागरूक संवेदनशील एवं न्यायप्रिय बनाना है, वहीं सचिव कु. डिंपल ने बताया कि राष्ट्रीय शिक्षा दिवस 11 नवम्बर भारत के पहले शिक्षा मंत्री मौलाना अब्दुल कलाम आजाद की जयंती के रूप में मनाया जाता है, जीवन में शिक्षा का सबसे अहम स्थान होता है शिक्षा के बारे में जागरूकता फैलाना और प्रत्येक व्यक्ति को साक्षर बनाने के लिए विभिन्न कार्यक्रम आयोजित किया जाता है। विश्व स्तर पर संयुक्त राष्ट्र(यूएन) 2025 की शिक्षा दिवस थीम ‘‘ एआई एंड एजुकेशनः- प्रिजर्विंग हुमन एजेंसी इन ए वर्ल्ड आफ आटोमेशन‘‘ जिसका अर्थ है कृत्रिम बुद्धिमत्ता के युग में मानव मूल्यों और नियंत्रण को  बनाये रखना,  जो व्यक्तियों और सामुदायों को तकनीकी प्रगति को समझने, समझाने और प्रभावित करने के लिए शिक्षा की शक्ति पर चिंतन को प्रोत्साहित करता है। राट्रीय शिक्षा दिवस का मूल उद्देश्य ‘‘शिक्षा को समाज परिवर्तन का माध्यम बनाना‘‘ शिक्षा सिर्फ पढ़ने-लिखने तक सीमित नहीं है, वह व्यक्ति, समाज और राष्ट्र को आकार देती है।‘‘

कार्यक्रम में प्राचीन परंपराओं का उल्लेख करते हुए बताया कि कैसे गुरूकुल से तक्षशीला नालंदा तक की शिक्षा ने विश्व में  भारत की विशिष्ट पहचान बनायी। ब्रिटिश काल में शिक्षा के बहुअयामी औपचारिक रूप ने संरचना बदली और स्वतंत्रता के बाद शिक्षा ने सर्वसुलभता का मार्ग अपनाया आज डिजिटल शिक्षा, विधिक जागरूकता और सामाजिक दायित्यों के साथ नई पीढी़ को सशक्त कर रही है। ज्ञान की रोशनी जब न्याय की राह से जुड़ती है तभी समाज उज्जवल भविष्य की ओर अग्रसर होता है।

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